केदारनाथ सीट पर टिकट आवंटन में चूक से उठ सकते हैं बगावती सुर
20 नवंबर को होना है केदारनाथ विधानसभा का उपचुनाव।

रूद्रप्रयाग: पूर्व विधायक स्वर्गीय श्रीमती शैला रानी रावत के निधन के पश्चात खाली हुई केदारनाथ विधानसभा सीट पर 20 नवंबर को होने वाले आगामी उपचुनाव हेतु चुनाव आयोग की घोषणा के लगभग एक सप्ताह व्यतीत हो जाने के बाद भी दोनों बड़ी राष्ट्रीय पार्टियां अपना प्रत्याशी घोषित नहीं कर पाई है। स्पष्ट है की दोनों पार्टियां प्रत्याशी चयन को लेकर फूंक फूंक कर कदम रख रही है। जहां एक ओर भाजपा पर अभी कुछ महीने पहले बद्रीनाथ और मंगलोर विधानसभा उपचुनाव में मिली हार के बाद केदारनाथ सीट से अपनी प्रतिष्ठा बचाने का दबाव है वहीं दूसरी ओर कांग्रेस केदारनाथ सीट को अपने कब्जे में कर 2027 के फाइनल से पहले माहौल अपने पक्ष में होने का संदेश देना चाहती है। यही कारण है कि प्रत्याशी चयन को लेकर दोनों पार्टियां अपनी स्तर से कोई भी चूक नहीं करना चाहती हैं
श्रीमती शैला रानी रावत के निधन की पश्चात ऐसा लग रहा था भारतीय जनता पार्टी बिना किसी लाग लपेट के एवं परंपरा अनुसार उनकी बेटी ऐश्वर्या रावत को इस सीट से अपने प्रत्याशी के रूप में उतारेगी। लेकिन जैसे-जैसे चुनाव की तिथि नजदीक आई वैसे-वैसे इस सीट से कई वर्षों से विधायक बनने के ख्वाब संजोए अनेक नेताओं के मन में भी विधायक बनने के सपने हिलोरें मानने लगे। और आज स्थिति ऐसी हो गई है कि चुनाव घोषणा के एक सप्ताह बाद भी पार्टी अपने प्रत्याशी घोषित नहीं कर पा रही है।
बद्रीनाथ और मंगलौर उपचुनाव में मिली हार से भाजपा के रणनीतिकार एक ऐसे चेहरे की तलाश में है जो केदारनाथ सीट निकालकर बीजेपी की झोली में डाल सके, जिसकी जनता के साथ-साथ पार्टी के अंदर भी स्वीकार्यता हो। पार्टी प्रत्याशियों में जिन लोगों के नाम इस समय प्रमुखता से लिए जा रहे हैं उनमें पूर्व विधायक रह चुकी एवं वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती आशा नौटियाल, स्वर्गीय पूर्व विधायक की पुत्री श्रीमती ऐश्वर्या रावत, हाल ही में भारतीय जनता पार्टी में सम्मिलित हुए कुलदीप सिंह रावत, केदारनाथ पुनर्निर्माण के बाद सुर्खियों में आए कर्नल अजय कोठियाल, दर्जाधारी राज्य मंत्री एवं पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्री चंडी प्रसाद भट्ट का नाम शामिल है।
जहां एक और ऐश्वर्या रावत अपनी स्वर्गीय पूर्व विधायक माता की उत्तराधिकारी होने, युवाओं के बीच अच्छी खासी लोकप्रियता एवं युवा चेहरा होने के कारण टिकट पाने की होड़ में मजबूती से डटी हैं वहीं दूसरी ओर आशा नौटियाल दो-दो बार की विधायक होने एवं संगठन एवं राजनीति का अच्छा खासा अनुभव होने के कारण टिकट की दावेदार मानी जा रही हैं। इन सब के बीच अभी कुछ समय पूर्व भारतीय जनता में सम्मिलित हुए श्री कुलदीप सिंह रावत का भी पूरी केदार घाटी में अच्छा खासा जानाधार एवं स्वीकार्यता है। निर्दलीय के तौर पर 2017 और 2022 में अच्छे खासे वोट हासिल कर वह अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं। ऐसे में स्पष्ट है कि प्रत्याशी घोषित होने के पश्चात पार्टी में बगावत जैसी बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता है।
सूत्रों की माने तो कांग्रेस पार्टी भी भारतीय जनता पार्टी के संभावित प्रत्याशियों पर नजरे लगाई बैठी है। हालांकि इस सीट पर कांग्रेस के कद्दावर नेता हरक सिंह रावत, पूर्व विधायक मनोज रावत, कांग्रेस जिला अध्यक्ष कुंवर सजवाण को कांग्रेस की ओर से टिकट का दावेदार बताया जा रहा है लेकिन सूत्रों की माने तो पार्टी इन संभावित दावेदारों की बजाय भाजपा के टिकट घोषणा के बाद रूठे प्रत्याशी को ही कांग्रेस की ओर से टिकट देकर भाजपा के वोट बैंक में सेंधमारी कर केदारनाथ सीट को जीतने की फिराक में है। यही कारण है कि कांग्रेस की ओर से भी अभी तक प्रत्याशी की घोषणा नहीं की गई है। बद्रीनाथ और मंगलौर में हुए उपचुनाव में बीजेपी को पटखनी देकर कांग्रेस के हौंसले इस समय बुलंदियों पर हैं और पार्टी किसी भी कीमत पर इस सीट को जीतना चाहती है।



